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मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

अमिताभ बच्चन : जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ

 बिग बी 68 साल में भी हमेशा की तरह व्यस्त
 
बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन का आज जन्मदिन है। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में जन्मे अमिताभ ने भारतीय सिनेमा में अपने बेमिसाल अभिनय की छाप छोड़ी।

अपनी पहली फिल्म सात हिन्दुस्तानी के जरिये अमिताभ ने बड़े पर्दे पर कदम रखा, लेकिन उन्हें पहली सफलता मिली प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर से। इसके बाद पर्दे पर उन्होंने एंग्रीयंग मैन को जिया जिसे दर्शकों का खूब प्यार मिला।

आज अमिताभ को बॉलीवुड में लगभग 45 साल का लंबा समय हो गया है और आज भी वे टॉप फाइव स्टार में शुमार किए जाते हैं। उम्र उन पर जरा भी हावी नहीं है और उनकी माँग अब भी बनी हु्ई है। उनका काम के प्रति समर्पण अपनी मिसाल खुद है।

फिल्म ‘पा’ में अपनी भूमिका के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से प्रफुल्लित सुपर स्टार अमिताभ बच्चन आज 68 साल के हो गए, लेकिन उम्र के इस पड़ाव में भी वह काफी मजबूत हैं और हिन्दी फिल्म जगत में अपनी पीढ़ी के कलाकारों में सबसे व्यस्त अदाकार बने हुए हैं।

बिग बी के लिए यह साल मिलाजुला रहा जो लोकप्रिय कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के चौथे संस्करण के प्रस्तोता हैं। इसी कार्यक्रम से उन्हें कभी अपने लड़खड़ाते बॉलीवुड करियर को पुनर्जीवित करने में मदद मिली थी। वह हाल की अपनी कई फिल्मों में विभिन्न रूपों में दिखे। हलाँकि वे बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा धूम नहीं मचा पाईं।

पिछले साल अक्टूबर में आई ‘अलादीन’ में वह एक जिन्न के रूप में दिखे। ‘तीन पत्ती’ में वह जाने-माने कलाकार बेन किंगस्ले के साथ गणित विशेषज्ञ के रूप में नजर आए। ‘पा’ में वह प्रोजेरिया नाम की बीमारी से पीड़ित एक बच्चे के रूप में सामने आए जिसने सिनेमाघरों में धूम मचाकर रख दी और साथ ही इसने बच्चन को इस साल का राष्ट्रीय पुरस्कार दिला दिया।

वर्ष 2008 में 66वें जन्मदिन के अवसर पर उनके स्वास्थ्य को खतरा पैदा हुआ जब बिग बी को पेट में दर्द के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वहाँ उनका ऑपरेशन हुआ जिसके बाद एक साल तक उन्होंने कोई नई फिल्म साइन नहीं की और सिर्फ कलर्स चैनल पर रीयलिटी शो ‘बिग बॉस’ को प्रस्तुत किया।

इस साल महानायक राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘पॉवर’ के लिए अमिताभ फिर से कैमरों का सामना कर रहे हैं जिसमें उनके साथ संजय दत्त अजय देवगन और अनिल कपूर भी हैं। इसके अतिरिक्त सोनी चैनल के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के प्रसारण के साथ छोटे पर्दे पर बिग बी का फिर से पदार्पण हो गया है।

बिग बी ने ‘पॉवर’ की शूटिंग इस महीने की शुरुआत में मुम्बई  में शुरू की थी। हाल ही में उन्होंने दक्षिण की ‘कंधार’ नाम की मलयालम फिल्म में शूटिंग पूरी की है जो 1999 में एक भारतीय विमान का आतंकवादियों द्वारा अपहरण कर लेने की घटना पर आधारित है।

‘पॉवर’ के अतिरिक्त बिग बी तेलुगू फिल्म निर्माता पुरी जगन्नाथ की ‘बुड्डा’ और प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण’ में भी काम कर रहे हैं।

अमिताभ के करीबी सूत्रों ने बताया कि महानायक ने शूटिंग से एक दिन की छुट्टी ली है ताकि वह अपना जन्मदिन बेटी श्वेता नंदा और उनके बच्चों नाव्या नवेली तथा अगस्त्य सहित परिवार के साथ मना सकें।

श्वेता और उनके बच्चे दिल्ली से आए हैं। हर साल की तरह देशभर से आए बच्चन के प्रशंसक सुबह से ही उनके दक्षिण मुम्बई स्थित आवास ‘जलसा’ के बाहर एकत्रित हैं ताकि महानायक की एक झलक पा सकें। 
 
जीरो थे हीरो अमिताभ 
11 अक्टूबर 1942 को जन्मे सुपरस्टार अमिताभ बच्चनकी सफलता को तो सब देखते हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे छिपा हुआ संघर्ष नजर नहीं आता। फिल्मों में आने के पहले भी अमिताभ ने संघर्ष किया। फिल्मों में आने के बाद उनकी संघर्ष की राह और कठिन हो गई। उन्होंने जो फिल्में की वे बुरी तरह फ्लॉप हो गईं। कई लोगों ने उन्हें घर लौट जाने की या कवि बनने की सलाह भी दे डाली। ‘जंजीर’ के हिट होने के पहले तक उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। आइए नजर डालें उस आरंभिक संघर्ष पर।

सात में से एक हिन्दुस्तानी
अजिताभ ने अमिताभ की कुछ तस्वीरें निकाली थीं, उन्हें ख्वाजा अहमद अब्बास के पास भिजवा दिया गया था। उन दिनों वे सात हिन्दुस्तानी फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे थे। इन सात में एक मुस्लिम युवक का रोल अमिताभ को प्राप्त हुआ। इस चुनाव के वक्त अब्बास साहब को यह नहीं मालूम था कि अमिताभ कवि बच्चन के साहबजादे हैं। उन्होंने उनसे अपने नाम का अर्थ पूछा था। तब उन्होंने कहा था, अमिताभ का अर्थ है सूर्य, और यह गौतम बुद्ध का एक नाम भी है। अब्बास साहब ने अमिताभ से साफ कह दिया था कि वे इस फिल्म के मेहनताने के रूप में पाँच हजार रुपए से अधिक नहीं दे सकेंगे। इसके बाद जब अनुबंध पर लिखा-पढ़ी की नौबत आई। अमिताभ की वल्दियत पूछी गई तो कवि बच्चन के सुपुत्र होने के नाते अब्बास साहब ने साफ कह दिया कि वे उनके पिता से इजाजत लेकर ही उन्हें काम देंगे। अमिताभ को कोई आपत्ति नहीं थी। अंततः उन्हें चुन लिया गया। 1969 में जब अमिताभ की यह पहली फिल्म (सात हिन्दुस्तानी) दिल्ली के शीला सिनेमा में रिलीज हुई, तब अमिताभ ने पहले दिन अपने माता-पिता के साथ इसे देखा। उस समय अमिताभ जैसलमेर में सुनील दत्त की फिल्म रेशमा और शेरा की शूटिंग से छुट्टी लेकर सिर्फ इस फिल्म को देखने दिल्ली आए थे। उस दिन वे अपने पिता के ही कपड़े कुर्ता-पाजामा शॉल पहनकर सिनेमा देखने गए थे, क्योंकि उनका सामान जैसलमेर और मुंबई में था। इसी शीला सिनेमा में कॉलेज से तड़ी मारकर उन्होंने कई फिल्में देखी थीं। उस दिन वे खुद की फिल्म देख रहे थे।

मीना कुमारी द्वारा प्रशंसा
अब्बास साहब अपने ढंग के निराले फिल्मकार थे। उन्होंने कभी कमर्शियल सिनेमा नहीं बनाया। उनकी फिल्मों में कोई न कोई सीख अवश्य होती थी। यह फिल्म चली नहीं, लेकिन प्रदर्शित हुई, यही बड़ी बात थी। रिलीज होने से पहले मीनाकुमारी ने इस फिल्म को देखा था। अब्बास साहब मीनाकुमारी का बहुत आदर करते थे। वे अपनी हर फिल्म के ट्रायल शो में उन्हें जरूर बुलाते थे। वे उनकी सर्वप्रथम टीकाकार थीं। ट्रायल शो में मीनाकुमारी ने अमिताभ के काम की तारीफ की थी, तब अमिताभ लजा गए थे।

संघर्ष जारी था
संघर्ष के दिनों में अमिताभ को मॉडलिंग के ऑफर मिल रहे थे, लेकिन इस काम में उनकी कोई रुचि नहीं थी। जलाल आगा ने एक विज्ञापन कंपनी खोल रखी थी, जो विविध भारती के लिए विज्ञापन बनाती थी। जलाल, अमिताभ को वर्ली के एक छोटे से रेकॉर्डिंग सेंटर में ले जाते थे और एक-दो मिनट के विज्ञापनों में वे अमिताभ की आवाज का उपयोग किया करते थे। प्रति प्रोग्राम पचास रुपए मिल जाते थे। उस दौर में इतनी-सी रकम भी पर्याप्त होती थी, क्योंकि काफी सस्ता जमाना था। वर्ली की सिटी बेकरी में आधी रात के समय टूटे-फूटे बिस्कुट आधे दाम में मिल जाते थे। अमिताभ ने इस तरह कई बार रातभर खुले रहने वाले कैम्पस कॉर्नर के रेस्तराओं में टोस्ट खाकर दिन गुजारे और सुबह फिर काम की खोज शुरू।

1 टिप्पणी:

namita ने कहा…

Amitabh Bachchan needs introduction in India even abroad. The man seems to hold in him a charisma that remains unrivalled. An entrepreneur, politician, game show host, a singer, voiceover artist, and an actor - the roles he played are immortalized and idolized. A huge fan base that reveres him as though he is a demi-god and a multitude of awards and recognition gravitates to him endlessly, year after year after year. But his ride to stardom was anything but smooth.