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सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

धनतेरस : विशेष अंक


पांच दिवसीय दीपावली पर्व का प्रारंभ धन त्रयोदशी अथवा धन्वंतरि जयंती के दिन से होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सायंकाल यमराज के निमित्त तेल का दीपक घर के द्वार पर लगाने से असामयिक मृत्यु नहीं होती तथा आरोग्य प्राप्त होता है।

इस दिन चांदी के बर्तन खरीदना अति शुभ माना जाता है। इसके अलावा आभूषण, बहुमूल्य धातुएं, संपत्ति आदि की खरीदी भी लाभकारी होती है।

सोमवार, 24-10-2011 को शुभ मुहूर्त में सराफा और बर्तन बाजार में जमकर खरीदी होगी। भगवान धन्वंतरि का पूजन भी होगा। सुख समृद्धि धन-धान्य की कामना की जाएगी। परिवार में संपत्ति व धन लक्ष्मी की पूजा होगी। वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की दुकानों पर भी भीड़ उमड़ेगी।

धन त्रयोदशी खास मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्

अमृत प्रातः 6.27 से 7.53

शुभ दिन 9.19 से 10.44

चंचल दिन 1.36 से 3.2

लाभ दिन 3.2 से 4.28

अमृत सायं 4.28 से 5.54

चंचल सायं 5.54 से 7.29

लग्न मुहूर्त

वृश्चिक लग्न प्रातः 8.17 से 10.33

कुंभ लग्न दिन 2.25 से 3.59

वृषभ रात्रि 7.10 से 9.8दि. 24-10-2011 
 
धन कमाने के लिए खास तांत्रिक प्रयोग प्रस्तुत है। इस प्रयोग को दीपावली के रात में किया जाता है। इस प्रयोग से किसी तरह की हानि नहीं होती। यह सभी साधारणजन के लिए असरकारी और आसान तांत्रिक प्रयोग है।

इस सरल तांत्रिक प्रयोग को पूर्ण पवित्रता से करने पर लाभ अवश्य मिलता है। लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धन की वर्षा होती है। रूका पैसा तो मिलता ही है आय के नए-नए साधन भी जुटने लगते हैं। सबसे पहले पूरी शुद्धता से नीचे दिए गए मंत्र की पहले 108 बार माला करें।


धन कमाने के सरल तंत्र-मंत्र
महालक्ष्मी मंत्र -
'ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:'

सरल वि‍धि :
* चांदी की एक छोटी-सी डिबिया लें। अगर चांदी की उपलब्ध नहीं हो तो किसी और शुद्ध धातु की डिबिया भी आप ले सकते हैं।


* इस डिबिया को आप ऊपर तक नागकेशर तथा शहद से भरकर बंद कर दें।

* दीपावली की रात्रि को इसका पूजन-अर्चन करके इसे अपने लॉकर या दुकान के गल्ले में रख दीजिए।

* रखने के बाद इसे खोलने की जरूरत नहीं है और ना ही और कुछ उपाय करने की।

* फिर अगली दीपावली तक इसे लॉकर या गल्ले में रखी रहने दें। दिनों दिन बढ़ती लक्ष्मी का चमत्कार आप स्वयं देखेंगे। 


 दिवाली लक्ष्मी पूजन विशेष मुहूर्त
Diwali Puja in Hindi
धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (संध्या) में करना चाहिए। लक्ष्मी उपासना का यही मुख्य समय माना गया है। अमावस्या अंधकार की रात्रि है। माता लक्ष्मी को समस्त संसार व चराचर को आलौकिक करने वाली देवी माना गया है। अतः संध्या काल में दीप प्रज्ज्वलित कर लक्ष्मी पूजन करने का उत्तम समय है।
पूर्वाभिमुख होकर करें पूजन : दिवाली पर माता लक्ष्मी के साथ लोक परंपरा अनुसार गुजरी के पूजन का महत्व है। माता लक्ष्मी का पूजन पूर्वाभिमुख होकर करना चाहिए। पूजन के समय सपरिवार माता की आराधना करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजन कभी भी नहीं करना चाहिए।
Diwali Puja in Hindi
सोलह दीप प्रज्ज्वलित करें : लक्ष्मी पूजन के समय सोलह दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। माता लक्ष्मी से पूर्व दीप पूजन करें। पश्चात इन दीपों को घर के द्वार, रसोई, बाथरूम, पंडेरी (जहां जल पात्र रखे जाते हैं), छत, घर के देव स्थान तथा मंदिर में रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त श्रद्घा व सामर्थ्य अनुसार दीपक लगाए जा सकते हैं।

पति के पूर्व जागती है पत्नी : दीपावली पर माता लक्ष्मी का पूजन धर्म व संस्कृति के साथ भारतीय परंपरा के महत्व को भी प्रतिपादित करता है। भारतीय परंपरा में पति से पूर्व पत्नी जागती है तथा घर की साफ-सफाई कर पति को जगाती है।

उसी अनुक्रम में दिवाली को देखा जा सकता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन होता है अर्थात माता लक्ष्मी पहले जाग जाती है। दिवाली से ग्यारह दिन पश्चात देवउठनी एकादशी आती है। धर्म शास्त्र की मान्यता अनुसार उस दिन भगवान श्री विष्णु जागते हैं।


Diwali Puja in Hindi
दीपावली पूजन विशेष मुहूर्त

प्रदोष समय- संध्या 5.50 से 7.02 बजे तक
प्रातः 6.32 से 9.22 बजे तक लाभ-अमृत
प्रातः 10.47 से 12.12 बजे तक शुभ
अपराह्न 3.02 से 5.05 बजे तक चंचल, लाभ
रात्रि 7.25 से 12.10 बजे तक शुभ, अमृत, चंचल
रात्रि 3.20 से 4 .55 बजे तक लाभ

स्थिर वृषभ लग्न
रात्रि 7.08 से 9.07 बजे त

सिंह स्थिर लग्न
रात्रि 1.35 से 3.47 बजे तक।

खरीददारी के लिए शुभ है धनतेरस
Dhanteras shopping

पुष्य नक्षत्र के बाद अब अगली खरीददारी अब धनतेरस को होगी। पर्व प्रधान होने के कारण पूरा दिन खरीददारी के लिए मंगलकारी माना जाता है, इसलिए लोग खरीददारी के लिए पहले से ही तैयारी कर रहे हैं।

धनतेरस से पहले गुरुवार को पुष्य नक्षत्र होने के कारण लोगों ने जमकर खरीददारी की। माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र में किसी भी सामान की खरीददारी फलदायी और शुभ होता है, इसके बावजूद कई लोग पुष्य नक्षत्र में खरीददारी से चूक गए। अब उनकी मंशा धनतेरस में खरीददारी करने की है।

पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार अलग-अलग दिन में तिथि और नक्षत्र के योग के आधार पर खरीददारी के लिए शुभ होता है। किसी दिन की तिथि उत्तम होती है, तो किसी दिन नक्षत्रों का योग रहता है।
Dhanteras shopping
इस साल पुष्य नक्षत्र गुरुवार को पड़ने के कारण तिथि और नक्षत्र दोनों उत्तम रहा है। इस तिथि में सोना-चांदी, जमीन, मकान-दुकान, वाहन आदि की खरीददारी शुभ होता है। इसे लोग फलदायी मानते हैं।

पुष्य नक्षत्र के बाद धनतेरस को खरीददारी के उत्तम फल है। यह दिन पर्व प्रधान है। धनतेरस का पूरा दिन खरीददारी के लिए उत्तम है। इस दिन खरीददारी मंगलकारी होता है।

हालांकि कि कुछ लोग धनतेरस में भी निश्चित समय देखते हैं, लेकिन इसका कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि धनतेरस में पूरा दिन खरीददारी के लिए शुभ होता है।
 धनतेरस
प्रचलित कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्होंने देवताओं को अमृतपान कराकर अमर कर दिया था। अतः वर्तमान संदर्भ में भी आयु और स्वस्थता की कामना से धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है। इस दिन वैदिक देवता यमराज का पूजन भी किया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रहकर यमराज की कथा का श्रवण भी करते हैं। आज से ही तीन दिन तक चलने वाला गो-त्रिरात्र व्रत भी शुरू होता है।
धनतेरस के दिन क्या करे
इस दिन धन्वंतरिजी का पूजन करें।
नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें।
सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें।
मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएँ।
यथाशक्ति ताँबे, पीतल, चाँदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं।
हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें।
कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआँ, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाएँ।

धनतेरस पूजन में क्या करे
(अ) कुबेर पूजन
शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएँ अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर पुनः स्थापित करें।
पश्चात नवीन बसना बिछाएँ।
सायंकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करते हैं।

कुबेर का ध्या
निम्न ध्यान बोलकर भगवान कुबेर पर फूल चढ़ाएँ -
श्रेष्ठ विमान पर विराजमान, गरुड़मणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा एवं वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत तुंदिल शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र निधीश्वर कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ।
इसके पश्चात निम्न मंत्र द्वारा चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें -
'यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।'

इसके पश्चात कपूर से आरती उतारकर मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें।
(ब) यम दीपदा
तेरस के सायंकाल किसी पात्र में तिल के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करें।
पश्चात गंध, पुष्प, अक्षत से पूजन कर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके यम से निम्न प्रार्थना करें-

'मृत्युना दंडपाशाभ्याम्‌ कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्‌ सूर्यजः प्रयतां मम

अब उन दीपकों से यम की प्रसन्नतार्थ सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशत करें।

इसी प्रकार एक अखंड दीपक घर के प्रमुख द्वार की देहरी पर किसी प्रकार का अन्न (साबूत गेहूँ या चावल आदि) बिछाकर उस पर रखें। (मान्यता है कि इस प्रकार दीपदान करने से यम देवता के पाश और नरक से मुक्ति मिलती है।)

यमराज पूज
इस दिन यम के लिए आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार पर रखें।
रात को घर की स्त्रियाँ दीपक में तेल डालकर चार बत्तियाँ जलाएँ।
जल, रोली, चावल, गुड़, फूल, नैवेद्य आदि सहित दीपक जलाकर यम का पूजन करें। 
 



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