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सोमवार, 12 सितंबर 2011

अनंत आनंद में डूब गया इंदौर, हर तरफ आस्था का सैलाब

इंदौर।रविवार को रात तो हुई लेकिन मालवा की शान के मुताबिक.. हर साल की तरह न तो इंदौर सोया न इंदौरी। कारण, बरसों पुरानी परंपरा को उत्साह से जो मनाना था। शाम 6.20 बजे जैसे झिलमिलाती झांकियों का कारवां श्रम शिविर कार्यालय से बढ़ा तो लगा जैसे पूरा शहर गणपति बप्पा को विदा करने के लिए आ गया हो।

धर्म हो या राजनीति, अथवा सामाजिक व्यवस्था या विकास की गाथा.. ये 27 झांकियां सब कुछ तो कह रही थीं। बाबा रामदेव पर पुलिसिया कहर हो या जेल में बंद अण्णा हजारे.. संजीवनी लाते हनुमान हों या महाकाल की भस्मारती.. झिलमिलाती झांकियों में जब ये दृश्य जीवंत हुए तो हर कोई रोमांचित हो उठा। बच्चे चहक रहे थे तो दूसरी तरफ युवा जोश में थे। बुजुर्ग और महिलाएं भी अनंत आनंद से वंचित नहीं होना चाहती थीं।

अनंत चतुर्दशी की झांकियों का मंगलाचरण करने मेघ सुबह ही नहीं, शाम को भी बरसे। तय समय से करीब 20 मिनट की देरी से कलेक्टर राघवेंद्रसिंह, एसएसपी साईं मनोहर ने खजराना गणोश की झांकी का पूजनकर कारवां श्रम शिविर से आगे बढ़ाया। सुहानी शाम जैसे-जैसे ढलती जा रही थी, वैसे-वैसे झांकियों की रंग-बिरंगी लाइट से मार्ग जगमगा उठा। अखाड़ों के खलीफा करतब दिखा रहे थे तो लड़कियां बनेटी और बच्चे बल्लम घुमाते दिखे।

फिर भी हुआ तालाबों में विसर्जन निगम ने शनिवार को ही अपील की थी कि वे पेयजल उपलब्ध करवाने वाले तालाबों में मूर्ति विसर्जित नहीं करें, परंतु इसका पालन कहीं होता नहीं दिखा। सिरपुर व बिलावली के मेन गेट पर जरूर कुछ कर्मचारियों ने लोगों को रोका, लेकिन अन्नपूर्णा तालाब, लिम्बोदी सहित कई छोटे जलाशयों में लोगों ने प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इस मामले में जनकार्य समिति प्रभारी जवाहर मंगवानी ने बताया हमने लोगों से अपील की थी। मूर्ति संग्रहण के लिए स्थान भी तय किए थे, फिर भी कुछ लोग नहीं माने।

मंत्री न महापौर, न ही गूंजा ‘छोटी-छोटी गय्या..’ हर साल चल समारोह में आकर्षक का केंद्र रहने वाले उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय चीन यात्रा के कारण यहां मौजूद नहीं थे। उनके स्थान पर विधायक जीतू जिराती और रमेश मंदोला ने ही भजन सुनाए। हालांकि दर्शक श्री विजयवर्गीय को तलाशते रहे। दूसरी ओर, नगर निगम की झांकी में हर साल महापौर भी शामिल होते आए हैं। हालांकि इस बार जयपुर जाने के कारण महापौर कृष्णमुरारी मोघे रात 11 बजे तक झांकी में शामिल नहीं हो पाए।
खजराना की आगे तो मिलों की झांकी सबसे पीछे 27 झांकियों के कारवां में सबसे आगे खजराना गणोश की झांकी थी। इस झांकी के साथ छोटा गणपति मंदिर, मल्हारगंज की झांकी भी शामिल हुई। इसके बाद नगर निगम, मालवा मिल, आईडीए, होप टेक्सटाइल्स, राजकुमार मिल, कल्याण मिल, कनकेश्वरी इन्फोटेक, स्वदेशी मिल, हुकुमचंद मिल, संस्था ब्रह्म चेतना और धार्मिक मंच की झांकी थी। धार्मिक मंच को अंतिम समय तक प्रशासन ने अनुमति नहीं दी जिससे उसे मालवा मिल के साथ ही निकालना पड़ी। पानी भरते-भरते झांकियां देखी नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग, आड़ा बाजार में देर रात नर्मदा लाइन के नलों से जल वितरण शुरू हो गया। इसके चलते लोगों ने झांकियां तो देखी हीं, पानी भी भरा। कुछ परिवार नगर निगम को कोसते भी रहे कि यह कोई समय है पानी देने का।
अंतिम समय में शामिल हुई एक झांकी हुकुमचंद मिल की झांकी के बाद भंडारी ब्रिज पर रात पौने 12 बजे संस्था ब्रrा चेतना की झांकी भी चल समारोह में शामिल हुई। इस झांकी में समुद्र मंथन का दृश्य दिखाया गया था।
सीसीटीवी कैमरे के कारण गुल हुई बिजली कनकेश्वरी इन्फोटेक की झांकी जेल रोड पर एक सीसीटीवी कैमरे से टकरा गई तो अचानक माइक बंद हो गया। करीब पांच मिनट बाद फिर माइक शुरू हुआ। इस पर विधायक जीतू जिराती व विस क्षेत्र दो के नेता भजन गाते हुए चल रहे थे।
मौसम की मेहरबानी का माना शुक्रिया लगातार हो रही बारिश के बीच झांकी देखने आए लोगों ने मौसम का शुक्रिया माना। सुबह हुई बारिश के बाद लोगों को अंदेशा था कि मौसम कहीं झांकियों का मजा न बिगाड़ दे। हालांकि रात 12 बजे तक किसी तरह मौसम खराब नहीं हुआ। इस दौरान निगम की झांकियां भी राजबाड़ा क्रास कर चुकी थी।
मलखंभ पर करतब ब्रजलाल गुरु व्यायामशाला के कलाकारों ने करतब से रिझाया। सभी अखाड़ों के उस्ताद अपने शागिर्दो को निर्देशित करते हुए कलाबाजियां दिखा रहे थे। नगर निगम की मूषकों द्वारा पूजा-अर्चना की झांकी को बच्चों ने खूब पसंद किया।
ऐसे चल पड़ा था कारवां6.30 बजे :खजराना गणोश की पहली झांकी जेल रोड स्थित गणोश मंडल पर पहुंची। 7.30 बजे :यही झांकी नॉवेल्टी मार्केट पहुंची। तब तक एक भी झांकी पीछे नहीं दिखी। (निगम की झांकी समय पर नहीं निकली तो कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। महापौर की पत्नी (महापौर शहर में नहीं हैं) व एमआईसी सदस्यों का इंतजार होता रहा। बाद में कलेक्टर ने ही झांकी को बढ़वाया।) 8 बजे :खजराना की झांकी एमजी रोड पर आई। (हर बार मंत्री के इंतजार में देरी से निकलने वाली कनकेश्वरी इन्फोटेक की झांकी इस समय चिकमंगलूर चौराहे के पास पहुंच गई थी। हालांकि यहां से वह करीब एक घंटे बाद बढ़ पाई।) 8.30 बजे :निगम व मालवा मिल की झांकी भी एमजी रोड पर आ गई थी। इस समय जेल रोड पूरा खाली हो गया था। आईडीए, कनकेश्वरी इन्फोटेक, राजकुमार मिल की झांकी चिकमंगलूर चौराहे से दरगाह चौराहे पर अटकी थी। (काछी मोहल्ला में नवयुवक मंडल की सजावट आकर्षक थी। भास्कर द्वारा चयनित की जाने वाली झांकियों का पैनल भी इसी मंच पर था। यहां भास्कर ट्रॉफी भी रखी गई थी, जो 13 सितंबर को दी जाएगी।) 9 बजे :निगम की झांकी कृष्णपुरा छत्री पहुंच गई थी, जबकि खजराना की झांकी नंदलालपुरा चौराहे पर थी। 10 बजे :सड़कें दर्शकों से पट गई थीं। जेल रोड, एमजी रोड, चिमनबाग, मिल एरिया पूरी तरह खचाखच था। इस वक्त खजराना की झांकी यशवंत रोड गुरुद्वारा पहुंच गई थी। रात 10 बजे :कल्याण मिल की झांकी के बाद कनकेश्वरी इंफोटेक को दरगाह चौराहे से आगे बढ़ाया गया। (एमजी रोड थाने पर जब आईडीए की झांकी थी तो मालवा मिल की झांकी जवाहर मार्ग पर थी। इसके कारण एमजी रोड थाने से नंदलालपुरा तक पूरा मार्ग खाली हो गया।) साढ़े 10 बजे :बंबई बाजार से खजराना व निगम की झांकियां निकल चुकी थी। पूरे झांकी मार्ग पर मजदूरों ने अण्णा टोपियां पहन रखी थीं। झांकियों में अलग-अलग घोटालों को लेकर भी खूब नारे लिखे गए थे। दो झांकियों में हनुमानजी की मूर्तियों ने दर्शकों का मन मोहा। छोगालाल उस्ताद व्यायामशाला के पहलवानों ने शरीर सौष्ठव दिखाकर लोगों का दिल जीता। 11 बजे :भंडारी ब्रिज पर जाम की स्थिति थी। मिलों की झांकियों इसी ब्रिज से निकली। रात 11 बजे यहां का नजारा देखने लायक था। साढ़े 11 बजे :खजराना गणोश की झांकी बाजारों से लौटकर वापस राजबाड़ा आ चुकी थी। वहीं, हुकुमचंद मिल की झांकी इस समय तक भंडारी ब्रिज के पास ही फंसी हुई थी। महिलाओं के करतब भी देखने लायक थे। हजारों लोगों ने खासकर तलवारबाजी देखी तो दांतों तलें उंगली दबा ली। कलेक्टर, एसएसपी वॉच टॉवर पर भी कई बार चढ़े और दूरबीन से सुरक्षा व्यवस्था के साथ चल समारोह का जायजा लेते रहे। पौने 12 बजे :मालवा मिल के समूह से जुड़ी धार्मिक मंच की झांकी अंतिम थी। 12 बजे यह भंडारी ब्रिज से उतरी। एक बजे :शिवाजी मार्केट के सामने मालवा मिल की झांकी की लाइट बंद हो गई। इससे झांकी को रोकना पड़ा।
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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