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बुधवार, 27 जुलाई 2011

कार्यस्थल पर सिगरेट नहीं प्लीज !

विश्व तंबाकू निषेध दिवस आया और गया मगर भारतीय कंपनी जगत में इसका खास असर नहीं हुआ. क्यों? आइए देखें:
लत छोड़ने का वक्त
भारत में कंपनी जगत के लोग कैंसर की दंडिका से मुक्ति पाने को लेकर कितने सचेत हैं? मैक्स हेल्थकेयर ग्रुप ने साथ की प्रमुख कंपनियों-जीई कैपिटल, इफको, विप्रो, स्पाइस बीपीओ, आइ-एनर्जाइ.जर और अन्य-के बीच यह संदेश फैलाने की कोशिश की कि धूम्रपान का वैज्ञानिक ढंग से निजात मुमकिन है.
19 से 35 की उम्र के-स्त्री-पुरुष बराबर-यही कोई 500 कर्मचारियों का सर्वे किया गया. आंतरिक चिकित्सा संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा और मैक्स में मानसिक स्वास्थ्य तथा व्यवहार विज्ञान के प्रमुख डॉ. समीर पारीख ने जवाबों का विश्लेषण किया. पता चला, लोग अंधाधुंध पी रहे हैं.
वैज्ञानिक ढंग से धूम्रपान छुड़ाने के उपचार के बारे में भारी अज्ञानता है. कंपनियां भी अपनी ओर से कोई मार्गदर्शन नहीं कर रहीं. अच्छी खबर यही है कि कंपनी जगत के इन फुक्कड़ों में अब यह लत छोड़ने की बेचैनी बढ़ रही है.

हमें कुछ नहीं पता
ज्‍यादातर दफ्तरों में धूम्रपान निषेध के संकेत बने होने के बावजूद लोगों को पता ही नहीं कि वह वर्जित क्षेत्र है. 75 फीसदी पुरुषों और 25 फीसदी महिलाओं को नहीं पता कि उनके दफ्तर में पीने की इजाजत कहां है.
छोड़ें या नहीं

50% कर्मचारी तो पिछले साल भर में एक बार भी 24 घंटे के लिए धूम्रपान नहीं छोड़ पाए हैं. 20 फीसदी ने कोशिश की पर वे भी नाकाम रहे.
67% कर्मचारियों को पता ही नहीं कि ध्रूमपान छोड़ने के वैज्ञानिक विकल्प भी हैं.

80% ने अपने या दूसरों के बताए तरीकों का प्रयोग करके धूम्रपान छोड़ने की कोशिश की. ऐसे प्रयास अमूमन निष्ह्ढभावी ही रहे, जिससे उनकी प्रेरणा में कमी आई.

80% लोग कार्यस्थल पर धूम्रपान छोड़ने के कार्यक्रमों का स्वागत करेंगे.

2 टिप्‍पणियां:

KAPIL DEV SHARMA ने कहा…

smokingchics.blogspot.com

ek bar ise bhi dekhe.....kya elaj kare aise llogo ko ....

तेजवानी गिरधर ने कहा…

very nice