देश की आशा हिंदी भाषा

समर्थक

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

बेटा हो या बेटी.. वो भगवान ने दीया हुआ फुल है..


बेटा वारिस है तो बेटी  पारस है..
बेटा वंश है तो बेटी अंश है..
बेटा आन है तो बेटी शान है...
बेटा तन है तो बेटी मन है..
बेटा मान है तो बेटी अभिमान है..
बेटा संस्कार है तो बेटी संस्कृति है..

बेटा आज है तो बेटी बाग़ है..
बेटा दवा है तो बेटी दुआ है..
बेटा भाग्य है तो बेटी विधाता है..
बेटा शब्द है तो बेटी अर्थ है..
बेटा गीत है तो बेटी संगीत है..
बेटा प्रेम है तो बेटी पूजा है..
बेटा हो या बेटी.. वो भगवान ने दीया हुआ फुल है..
 

कोई टिप्पणी नहीं: