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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

नौकरियों की रफ्तार


रसातल छू रही आर्थिक विकास दर के मौजूदा दौर में रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार के सामने गंभीर सवाल हैं। पिछले दिनों सीआईआई की ओर से आयोजित ग्लोबल पार्टनरशिप समिट में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने माना, ‘भारत में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के बाद बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है और इसका मुकाबला करने के लिए प्राइवेट सेक्टर से मदद की दरकार है..आने वाले 15 साल में भारत के सामने नौकरी चाहने वाले 25 करोड़ अतिरिक्त चेहरे होंगे।’ इन हालात के बीच 2013 के बाकी महीनों में रोजगार के मौकों पर चर्चा करते वक्त जॉब मार्केट के जानकार बेहद सतर्क हैं। नौकरीडॉटकॉम के वाइस प्रेसिडेंट वी सुरेश का कहना है, ‘जब विकास दर 5 फीसदी के स्तर पर हो, तो जॉब मार्केट के बारे में कोई भी भविष्यवाणी मुश्किल है। हालांकि, कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो निश्चित ही उम्मीद जगाते हैं। मसलन, आईटी, बैंकिंग और आईटी आधारित सेवाओं में सबसे ज्यादा नौकरियों के आसार हैं।’ 
 
जॉब मार्केट की उम्मीदें
 
प्राइवेट सेक्टर के 1200 रोजगारदाताओं के साथ किए गए अपने ताजा सर्वेक्षण के आधार पर सुरेश का कहना है, ‘जुलाई 2012 के 62 फीसदी की तुलना में इस समय 68 फीसदी कंपनियां अपने यहां कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी की बात कह रही हैं।’ उनके मुताबिक 77 फीसदी कंपनियां आईटी और बैंकिंग सेक्टर में रोजगार के नए मौके बनने की उम्मीद जाहिर कर रही हैं। लेकिन 10 फीसदी कंपनियां आने वाले समय में भर्तियों पर रोक के अलावा कंस्ट्रक्शन, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में काफी हद तक रिप्लेसमेंट हायरिंग की बात करती हैं। यानी इन सेक्टरों की कंपनियां जो भर्तियां करेंगी, वे अपने कुछ मौजूदा कर्मचारियों को बदलने के लिए होंगी। इन तीनों सेक्टरों की कंपनियां यह भी मानती हैं कि यहां योग्य कर्मचारियों की बेहद कमी है, इस वजह से रोजगार के अवसर बने हुए हैं। तेल और गैस, शिक्षा, तेजी से खपत वाले उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी) और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर दिखने की उम्मीद है। 
आने वाले समय में होने वाले चुनावों के मद्देनजर सामाजिक क्षेत्र की कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर सरकारी खर्च की संभावना है। माइक्रो बैंकिंग टेक्नोलॉजी फर्म  फिनो पेटेक के एचआर हेड संजय कुमार का कहना है, ‘आधार कार्ड से कैश ट्रांसफर जैसी कई नई योजनाओं को अमली जामा पहनाया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आम और खास डिग्रीधारियों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। लेकिन ज्यादातर मौके आधुनिक टेक्नोलॉजी के जानकारों के लिए होंगे।’ सुरेश भी चुनाव से पहले बुनियादी ढांचे में सरकार के कदमों को लेकर आश्वस्त हैं। उनके मुताबिक, ‘सुधार की दिशा में सरकार के हालिया कदमों से बैंकिंग, शिक्षा, रिटेल और आईटी आधारित सेवाओं में रोजगार के नए अवसर तय हैं।’
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बिगड़े हालात को देखते हुए नौकरी बदलकर दूसरी कंपनियों में छलांग लगाने वाले कर्मचारियों की संख्या चार साल में पहली बार काफी हद तक घटी है। सर्वे में शामिल 63 फीसदी कंपनियां बताती हैं कि जुलाई 2012 के 55 फीसदी की तुलना में महज 10 फीसदी कर्मचारी ही नौकरी छोड़ने की हिम्मत जुटा रहे हैं। ऐसी स्थिति में रोजगार के नए मौके कम हो जाते हैं। सर्वे के मुताबिक 36 फीसदी कंपनियां 2013 में वेतन में सिंगल डिजिट ग्रोथ की भविष्यवाणी कर रही हैं। लेकिन आईटी आधारित सेवाओं व कंस्ट्रक्शन सेक्टर में वेतन की बढ़ोतरी सबसे ज्यादा (10 से 15 फीसदी) दिखाई देगी।
 
आईटी-सॉफ्टवेयर में कई मौके
 
आईटी आधारित सेवाएं, आईटी-सॉफ्टवेयर और बीपीओ जैसे सेक्टरों में नए जॉब्स के अलावा रिप्लेसमेंट जॉब्स को लेकर भी अच्छे आसार हैं। लेकिन कंपनियों का कहना है कि फ्रेशर्स यानी इसी साल कॉलेज से डिग्री पूरी कर बाहर निकले छात्रों की जगह 4 से 8 साल तक के अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए जॉब्स के मौके ज्यादा होंगे। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के एचआर डायरेक्टर रोहित ठाकुर का कहना है, ‘प्रोडक्टिविटी से लेकर कम्युनिकेशन तक और काम की रफ्तार बढ़ाने से लेकर बेहतर कारोबारी फैसलों पर पहुंचने तक, टेक्नोलॉजी अहम रोल अदा करती है। कंपनियां इसमें निवेश करना जारी रखेंगी।’ ठाकुर के मुताबिक, ‘टेक्नोलॉजी में इनोवेशन करने वाले और उसे सपोर्ट करने वाला टैलेंट भी हमेशा डिमांड में रहेगा। माइक्रोसॉफ्ट की बात करें तो प्रोडक्ट डेवलपमेंट में भागीदारी, रिसर्च, उभरते हुए बाजारों के लिए सॉल्यूशंस, दुनिया भर में बिजनेस को सपोर्ट करने वाले मॉडच्यूल और विश्वस्तरीय उत्पादों के लिए मार्केटिंग के क्षेत्र में अवसर हैं। इन सेगमेंट में नियुक्तियां जारी रहेंगी।’
 
 
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी ठोस
 
इस सेक्टर में भी अनुभवी पेशेवरों से लेकर कुशल कारीगरों तक, सभी की अच्छी मांग है। एनसीआर की प्रमुख रीयल एस्टेट फर्म रामप्रस्थ ग्रुप के सीईओ निखिल जैन कहते हैं, ‘कारपेंटर, प्लंबर, मेसन और इलेक्ट्रिशियन की मांग लगातार जारी है।’ दिल्ली की एचआर फर्म डायनामिक के सीनियर जनरल मैनेजर एस. सी. त्यागी कहते हैं, ‘कंस्ट्रक्शन कंपनियों को माहिर पेशेवर नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह कुशल कारीगरों की कमी के चलते निर्माण कंपनियां एक-दूसरे के प्रोजेक्ट में काम करने वाले प्लंबर, कारपेंटर, राज मिस्त्री आदि को ज्यादा पैसा और सुविधाएं देकर तोड़ने से भी परहेज नहीं कर रहीं। भिवाड़ी के एक मेगा हाउसिंग प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर नितिन शर्मा कहते हैं,‘कंस्ट्रक्शन कंपनियां प्रोजेक्ट वक्त पर पूरा करने के लिए एक-दूसरे के प्रशिक्षित कारीगरों को तोड़ने से गुरेज नहीं कर रहीं।’ 
 
वित्तीय सेवाएं
 
भारत ही नहीं विश्व की अर्थव्यवस्था बुरा दौर देख चुकी है। अलग-अलग अनुमानों पर गौर करें, तो इस साल जीडीपी ग्रोथ 5-6 फीसदी की रेंज में रह सकती है। पिछले दिनों सेंसेक्स के उछाल ने बैंकिंग सहित पूरे फाइनेंशियल सेक्टर की उम्मीदें बढ़ाई थीं। इंटेक कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव गोयल ने बताया कि बिजनेस ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए वे साल 2013 में नई भर्तियों को लेकर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं। उनका मानना है, ‘समूचे भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर में ही रोजगार को लेकर अच्छी संभावनाएं हैं। सेल्स, ऑपरेशंस, क्रेडिट, अकाउंट और मार्केटिंग सर्विसेज जैसे अलग-अलग सेगमेंट में अवसर हैं। मजबूत कम्युनिकेशन स्किल्स, नेटवर्किग क्षमताओं, सकारात्मक रुख और जिम्मेदारी पूरी करने के लिए जरूरी योग्यताओं पर जोर दिया जा रहा है।’ मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के चीफ पीपल ऑफिसर शैलेश सिंह के मुताबिक, ‘हमने बीते 18-24 महीनों में बीमा कंपनियों को फोकस और कंसॉलिडेट करते हुए देखा है। कंपनियां खर्च पर शिकंजा कसेंगी और मुनाफे देने वाली ग्रोथ पर निगाह रखेंगी। इसलिए सीनियर लेवल पर कम ही नियुक्तियों की संभावना है। नियुक्तियों का पूरा फोकस रिप्लेसमेंट पर रहेगा। हालांकि, एजेंट एडवाइजर के जरिए होने वाली बिक्री की तुलना में ऑनलाइन सेलिंग और बैंक चैनल के जरिए ज्यादा बिकवाली होगी, जिससे इनमें ज्यादा भर्तियों की गुंजाइश रहेगी।’ 
 
 
ऑटो सेक्टर में नौकरियों की रफ्तार
 
ऑटो सेक्टर जॉब मार्केट में डिमांड फिर से दिखाई दे रही है। ज्यादातर बड़ी कंपनियों ने मैन्युफेक्चरिंग के साथ ही आरएंडडी  में निवेश किया है। हिन्दुस्तान मोटर्स के जनरल मैनेजर राजीव सक्सेना कहते हैं, ‘ऑटो सेक्टर में मार्केटिंग प्रोफेशनल के अलावा इंजीनियरों की दरकार है।’ चूंकि इस सेक्टर में कंपनियां टैलेंट की कमी की बात कहती हैं, इस वजह से यहां नौकरी बदलने वालों की संख्या तुलनात्मक रूप से ज्यादा रहती है। इससे दूसरों के लिए रोजगार की संभावनाएं बनती रहती हैं। लेकिन ज्यादातर कंपनियां प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों के लिए ही बेहतर संभावनाएं मान रही हैं।
 

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